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जनता का पैसा,जनप्रतिनिधि की दूरी! 3 साल में एक भी पंचायत नहीं पहुंचीं भैंसदेही जनपद अध्यक्ष, लेकिन भत्ते में खर्च 12 लाख 60 हजार से ज्यादा

(भैंसदेही शंकर राय)भैंसदेही जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती संजय धुर्वे के कार्यकाल को लगभग तीन वर्ष पूरे होने को हैं। लेकिन इतने लंबे समय में उन्होंने जनपद क्षेत्र की 50 पंचायतों में से किसी एक का भी निरीक्षण नहीं किया यह तथ्य अब प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का विषय बन गया है।
जनपद अध्यक्ष की निष्क्रियता से पंचायतों में अव्यवस्था पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जनपद अध्यक्ष के निरीक्षण के अभाव में पंचायत सचिव और सरपंचों की जवाबदेही भी लगभग खत्म हो गई है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और गति पर साफ देखा जा सकता है।
दौरे नहीं, लेकिन वाहन भत्ते पर ₹12.60 लाख खर्च जनपद अध्यक्ष को पंचायत क्षेत्रों में निरीक्षण और भ्रमण के लिए प्रति माह ₹35,000 का वाहन भत्ता दिया जाता है। तीन वर्षों के इस कार्यकाल में कुल 36 महीनों के हिसाब से ₹12,60,000 रुपए का भुगतान जनपद कार्यालय से किया जा चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद एक भी पंचायत दौरे का कोई प्रमाण या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि इस राशि का उपयोग आखिर किस उद्देश्य के लिए किया गया?
विकास कार्यों पर दिख रहा असर पंचायत क्षेत्रों में सड़क निर्माण, भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों में अनियमितता और लापरवाही सामने आ रही है। कई स्थानों पर अधूरी योजनाएं वर्षों से अटकी पड़ी हैं। जनपद अध्यक्ष के मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं करने से निर्माण एजेंसियों पर कोई दबाव नहीं रह गया है, जिससे कार्यों में मनमानी देखी जा रही है।
जनता पूछ रही कहाँ है ज़मीनी जिम्मेदारी?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि सिर्फ पद या भत्ते तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें जनता के बीच जाकर समस्याओं को समझना चाहिए। तीन साल में एक भी पंचायत न जाना, केवल आंकड़ों में विकास दिखाना यह जनादेश और सरकारी धन दोनों की उपेक्षा है।
पद और अधिकार का सही उपयोग तभी होता है जब उसका लाभ जनता तक पहुंचे। तीन वर्षों में 50 पंचायतों से दूरी और ₹12 लाख से अधिक राशि खर्च होने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है क्या भैंसदेही की जनता ने सिर्फ कागज़ों पर चलने वाले नेतृत्व के लिए वोट दिया था?”

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