(भैंसदेही शंकर राय) मध्यप्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन उससे पहले ही आठनेर के जगदंबा वेयरहाउस में मूंग से भर होने की जानकारी सूत्रों से मिली है और इस बार किसान नहीं, बल्कि बिचौलिए इस मौके का फायदा उठाने वाले है। क्योंकि सरकार ने मूंग खरीदी को लेकर रजिस्ट्रेशन और खरीदी करने के लिए आदेश दे दिए हैं। लेकिन इस बार किसान नहीं बल्कि बड़े व्यापारी मूंग खरीदी में अपना खेल खेलने वाले हैं। जानकारी यहां भी मिली है कि अधिकतर मूंग महाराष्ट्र से खरीदी गई है। जिसमें बिचौलियों ने खरीदी से पहले अपना पूरा सिंडिकेट तैयार कर लिया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आठनेर के जगदंबा वेयरहाउस में हजारों टन मूंग पहले से ही रखी जाने की जानकारी सूत्रों से मिली है। लेकिन ये मूंग किसी किसान की नहीं, बल्कि बड़े व्यापारियों और बिचौलियों की है। वेयरहाउस संचालक से हमाने जानकारी ली तो उन्होंने पहले तो यहां कहा कि मूंग पर वहां एचडीएफसी बैंक से फाइनेंस करने वाले हैं इसलिए वेयरहाउस में मूंग रखी है। फिर उन्होंने बाद में यहां क्लियर किया कि मूंग वेयरहाउस में जरूर रखी है लेकिन यहां एक व्यापारी की है। इससे कहीं ना कहीं बिचौलियों का खेल साफ-साफ दिख रहा है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि जब खरीदी अभी शुरू नहीं हुई और वेयरहाउस में हजारों कुंटल मूंग पहुंचने लगी है। जो कि नियमों के विरुद्ध है।

सरकारी खरीद में MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी जाती है। इसका लाभ किसानों को मिलना चाहिए — लेकिन इस बार, खरीदी शुरू होने से पहले ही वेयरहाउस बिचौलियों के मूंग से भर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि मूंग की खरीदी MSP पर की जाएगी — जिसका दाम इस बार ₹8,682 प्रति क्विंटल तय किया गया है। लेकिन वास्तविक लाभ किसे मिलेगा यही बड़ा सवाल बन गया है।

सरकार कह रही है कि मूंग खरीदी में पारदर्शिता लाई जाएगी और किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन अब सवाल ये है —
क्या बिचौलियों के इस खेल को रोका जाएगा?
क्या असली किसान को उसका हक मिलेगा?”


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