दो कर्मचारियों पर जांच की आंच,फंसने के डर से कुकरू रेस्ट हाउस के पास वाहन छोड़कर भागे अज्ञात चार माह से लापता वन विभाग का सरकारी बोलेरो संदिग्ध हालत में मिली।
(भैंसदेही शंकर राय)दक्षिण वनमंडल के भैंसदेही परिक्षेत्र में चार महीने से लापता सरकारी बोलेरो वाहन क्रमांक MP-02-AV-2245 आखिरकार संदिग्ध हालात में कुकरू रेस्ट हाउस के पास लावारिस अवस्था में खड़ा मिला। इस प्रकरण में पूर्णा एक्सप्रेस पोर्टल की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने जांच शुरू की, जिसके बाद वाहन का यूं अचानक मिल जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वाहन के गायब होने की कोई रिपोर्ट थाने में दर्ज ही नहीं कराई गई थी। यदि यह मामला मीडिया में न उठाया गया होता, तो संभवतः यह सरकारी संपत्ति वर्षों तक गायब ही मानी जाती। जांच के दौरान परिक्षेत्र के दो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें से एक कर्मचारी का हाल ही में स्थानांतरण हो चुका है, जबकि दूसरा अब भी उसी परिक्षेत्र में पदस्थ है। सूत्रों के मुताबिक, वाहन को जानबूझकर गायब किया गया था, और अब जब जांच की आंच तेज हुई तो उसे रातों-रात लौटाकर लावारिस हालत में खड़ा कर दिया गया।
वाहन की मरम्मत भी बनी रहस्य वाहन की मरम्मत कब, कहां और किसके आदेश पर कराई गई, इसका भी कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। मरम्मत करने वाले मैकेनिक की जानकारी भी जिम्मेदारों द्वारा छिपाई जा रही है।
हालांकि जांच अधिकारी एसडीओ संजय साल्वे का दावा है कि वाहन की मरम्मत करने वाले मैकेनिक के बयान लिए जा चुके हैं, लेकिन यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि मरम्मत किसके निर्देश पर कराई गई, और वाहन का उपयोग कौन कर रहा था।
क्या जांच होगी निष्पक्ष या फिर लीपापोती? पूरा मामला अब जांच की निष्पक्षता पर टिका है। यदि सिर्फ औपचारिकता निभाई गई और दोषियों को बचाया गया, तो यह विभागीय प्रणाली की गंभीर विफलता मानी जाएगी। वहीं अगर तथ्यों के आधार पर पारदर्शी जांच की गई, तो दोषियों पर विभागीय के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
इनका कहना
वाहन कुकरू रेस्ट हाउस के पास मिलने की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संजय साल्वे, एसडीओ, मुलताई।