मुलताई (पीयूष शर्मा) इस वर्ष सूर्यपुत्री मां ताप्ती के जन्मोत्सव को केवल एक धार्मिक पर्व के रूप में न मनाकर, उसे समाज सेवा, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जोड़कर एक नया और सार्थक रूप दिया गया है। मां ताप्ती तीर्थ क्षेत्र न्यास, मुलताई की पहल पर चल रहे “मेरा गांव, मेरा तीर्थ सप्ताह” के अंतर्गत आसपास के गांवों में यह उत्सव एक जनआंदोलन जैसा बनता जा रहा है।

पूरे सप्ताह क्षेत्र के विभिन्न गांवों में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जनजागरूकता रैलियां, सांस्कृतिक आयोजन, और लोकगीतों के माध्यम से ताप्ती महिमा का गुणगान किया गया। गांव-गांव में लोगों ने मिलकर ना केवल मंदिरों की सफाई की, बल्कि तालाबों, कुओं, और सार्वजनिक स्थलों को भी तीर्थ के रूप में संजोने का संकल्प लिया।

आज शासकीय कन्या शाला परिसर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में पौधे रोपे गए। मुख्य अतिथि श्री शिवशंकर जी भाईसाहब (प्रांत पर्यावरण संयोजक, RSS), श्री मोहन नागर जी (उपाध्यक्ष, जन अभियान परिषद), विधायकगण, एवं नगर प्रमुखों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

मोहन नागर जी एवं शिवशंकर जी ने अपने संबोधन में कहा कि “तीर्थ केवल मंदिर नहीं, हमारी धरती, जल और वायु भी पूजनीय हैं। ताप्ती जनमोत्सव अब प्रकृति पूजा का प्रतीक बन गया है।” गत 9 वर्षों से मां ताप्ती तीर्थ क्षेत्र न्यास द्वारा चलाया जा रहा “ताप्ती उपवन” अभियान अब गांव-गांव तक फैल चुका है। इस वर्ष कन्या विद्यालय परिसर में “ताप्ती उपवन” की नींव रखी गई, जो आने वाले समय में एक सुंदर, शीतल और शिक्षाप्रद वाटिका के रूप में विकसित होगा।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को, बल्कि ग्राम्य चेतना, पर्यावरण प्रेम और सामूहिक उत्तरदायित्व को भी जीवंत करता है। मां ताप्ती के नाम पर आज एक नई सामाजिक संस्कृति आकार ले रही है – जो गांव को ही तीर्थ मानती है और प्रकृति को ही पूजा।


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