( भैंसदेही शंकर राय) भैंसदेही के चिल्कापुर में सामुदायिक विकास और जनकल्याण के नाम पर स्वीकृत सरकारी योजनाएं कैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं, इसकी एक सजीव मिसाल बन चुका है [चिल्कापुर पंचायत] का सामुदायिक मंगल भवन। इस भवन के निर्माण में सचिव और सरपंच की मिलीभगत से जो घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ है, वह जांच और दंड की माँग कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक भवन सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया है, लेकिन भ्रष्टाचार ने इसे भ्रष्ट आचरण का प्रतीक बना दिया है। अब यह जनता के लिए नहीं, केवल बिलों और कमीशनखोरी का माध्यम बनकर रह गया है।

“सरपंच और सचिव के खिलाफ तकनीकी जांच होनी चाहिए, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की थर्ड पार्टी ऑडिट कराई जाए और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो F.I.R. दर्ज कर कार्रवाई हो ऐसा ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है।

सरकारी योजनाओं का उद्देश्य यदि केवल फाइलों तक सीमित रह जाए, और जमीन पर जनता को सिर्फ कमजोर दीवारें और घटिया छतें मिलें — तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है। अब वक्त है जब पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों पर स्वतंत्र और ईमानदार निगरानी तंत्र बनाया जाए, ताकि “विकास का पैसा वसूली का ज़रिया न बने।

कैसे हुआ भ्रष्टाचार? – स्थानीय नागरिकों के गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- सचिव और सरपंच ने ठेकेदार के साथ मिलकर प्रारंभिक निर्माण को जानबूझकर अधूरा छोड़ा, ताकि बाद में अलग-अलग किश्तों में धन निकालकर बिना गुणवत्ता की जांच के खर्च किया जा सके।
- निर्माण स्थल पर कोई माप, पर्यवेक्षण या इंजीनियर की नियमित रिपोर्टिंग नहीं हुई।
- एक ही काम को दो-दो बार बिल बनाकर दर्शाया गया, जैसे छत लेवल तक कार्य पहले हो चुका था, फिर वही हिस्सा दोबारा बिल में जोड़ा गया।
- स्थानीय ठेकेदारों को बिना टेंडर के कार्य दे दिया गया।
- भवन निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, रेत और सरिया की क्वालिटी बेहद निम्न है।

- कहां से आया पैसा, और कहाँ गया?
- इस सामुदायिक भवन के लिए कुल ₹21.35 लाख की स्वीकृति विभिन्न मदों से मिली:

- ₹10 लाख – राज्य वित्त आयोग
- ₹6.35 लाख –15वें वित्त आयोग से छत निर्माण हेतु
- ₹5 लाख – पंचायत निर्वाचन प्रोत्साहन राशि से
- कुल राशि: ₹21 लाख 35 हजार

- कैसा हुआ निर्माण? सिर्फ कागज़ों में ही मजबूत!
- पाँच साल तक बंद पड़ा निर्माण कार्य, हाल ही में ठेके पर काम देकर जल्दबाजी में छत डाली गई।
- बिना बीम डाले छत निर्माण कर दिया गया, जिससे भवन की संरचना असुरक्षित हो गई है।
- छत में केवल 8mm का लोहा डाला गया — जबकि सरकारी मानकों के अनुसार कम से कम 10–12mm आवश्यक होता है।
- कागजों पर छत निर्माण पर 8 लाख रुपये से अधिक का बिल पास कर लिया गया।
- अब प्लास्टर का काम भी जल्दबाजी में ठेके पर देकर किया जा रहा है — जिसकी गुणवत्ता बेहद घटिया


[responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="यह खबर हिंदी आडिओ में सुने "]