(भैंसदेही/शंकर राय) भैंसदेही के झल्लार में पेट्रोल पंप शील खोलने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला अब जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक सनसनी बन चुका है। यह वही मामला है, जिसमें कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी धरमदास पनिका का घूसखोरी करते हुए वीडियो खुद पीड़ित पेट्रोल पंप संचालक नयन आर्य ने बैतूल जिला कलेक्टर को सौंपा था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस साफ-साफ सबूत के बावजूद आज तक आरोपी अफसर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल सीधा है — क्या रिश्वतखोर अफसर को बचाने के लिए ‘बड़े लोग’ पर्दे के पीछे खेल खेल रहे हैं?

दबाव, लालच और धमकी — सब एक साथ
नयन आर्य ने पूर्ण एक्सप्रेस को चौंकाने वाले खुलासे करते हुए बताया कि शिकायत वापस लेने के लिए अब बड़े-बड़े वेयरहाउस संचालकों और राजनीतिक रसूखदारों के फोन आने लगे हैं। मामले को ‘दबाने’ के लिए लाखों रुपये का लालच दिया जा रहा है, लेकिन यहां कहानी और भी खतरनाक हो जाती है उन्होंने बताया कि उनके परिवार को धमकाया जा रहा है, कहा जा रहा है कि अगर शिकायत वापस नहीं ली तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।

न्याय की उम्मीद या सत्ता की ढाल?
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिरकार, जब आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत मौजूद हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों? क्या प्रशासनिक तंत्र में ‘सत्ता और पैसे’ की ढाल ने कानून को बंधक बना दिया है?

अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस ‘रिश्वत कांड’ में अपनी छवि बचाता है या फिर अधिकारियों को बचाने की कोशिश में खुद कठघरे में खड़ा हो जाता है।


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