(भैंसदेही/शंकर राय) भैंसदेही नगर की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अनुशंसा और जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार की स्वीकृति के बाद, आखिरकार दो बार के महामंत्री रह चुके दिलीप घौरे को भारतीय जनता पार्टी का नगर मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

क्यों खास है यह नियुक्ति?
दिलीप घौरे कोई साधारण नाम नहीं हैं। संगठन में उनकी यात्रा की शुरुआत ABVP जैसे जमीनी संगठन से हुई और इसके बाद भाजपा नगर मंडल में दो बार महामंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और रणनीतिक कौशल से कार्यकर्ताओं और नेताओं का भरोसा जीता पत्रकारिता में भी वे हमेशा सामाजिक सरोकारों के मुद्दों को उठाते रहे हैं। यही कारण है कि घौरे न सिर्फ एक भाजपा कार्यकर्ता बल्कि समाज के हर तबके में एक मजबूत और जिम्मेदार चेहरे के रूप में पहचान बना चुके हैं।

विधायक की पहली पसंद बने घौरे सूत्र बताते हैं कि इस बार संगठन से ज्यादा विधायक की सहमति को महत्व दिया गया और विधायक की पहली पसंद भी दिलीप घौरे ही रहे।

यही वजह है कि उन्हें नगर मंडल की कमान सौंपकर साफ संदेश दिया गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा स्थानीय स्तर पर किसी तरह की ढिलाई नहीं छोड़ना चाहती।

मनीष सोलंकी की विरासत और घौरे का उदय
पूर्व नगर अध्यक्ष मनीष सोलंकी ने भी भाजपा को कठिन समय में मजबूती दी थी। जब पार्टी सत्ता से बाहर थी, तब भी सोलंकी ने कार्यकर्ताओं को जोड़े रखा और संगठन को बिखरने नहीं दिया। यही नहीं, उन्होंने ही अपने कार्यकाल में दिलीप घौरे को महामंत्री बनाकर संगठन की मुख्यधारा में स्थापित किया था। इस मायने में कहा जा सकता है कि घौरे की यह नियुक्ति सोलंकी की संगठन पर पकड़ और उनके फैसलों का ही परिणाम है।

कार्यकर्ताओं की उमंग, नई सोच की उम्मीद
घौरे के नाम की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय कार्यकर्ता मानते हैं कि घौरे में अनुभव, व्यापक संपर्क और संगठनात्मक समझ तीनों का अद्वितीय मेल है। यही कारण है कि अब कार्यकर्ताओं की आवाज़ साफ कह रही है समय आ गया है नई सोच और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का।

राजनीतिक मायनों में बड़ा संकेत नगर मंडल अध्यक्ष की यह नियुक्ति केवल एक पद की भरपाई नहीं है, बल्कि यह भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी, युवाओं की भागीदारी और संगठन विस्तार का रोडमैप है। दिलीप घौरे का चयन इस बात का संकेत है कि भाजपा अब स्थानीय स्तर पर भी नए और सक्षम चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।

दिलीप घौरे के नाम पर मुहर लगने के बाद न केवल कार्यकर्ता बल्कि बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक भी यह मान रहे हैं कि आने वाले समय में भैंसदेही भाजपा की राजनीति का चेहरा और चाल बदलने वाली है।


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