(भैंसदेही/शंकर राय) भैंसदेही नगर का ऐतिहासिक रंगमंच एक बार फिर धर्म, आस्था और संस्कृति के उज्ज्वल दीप से आलोकित हो उठा। नवरात्रि के प्रथम दिवस नवयुवक दुर्गा रामलीला मंडल ने अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 79वें वर्ष की भव्य और ऐतिहासिक शुरुआत की।

इस अवसर पर हुए मंच पूजन में नगर के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और धर्मप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पावन पूजन में रामलीला मंडल संरक्षक पं. श्यामनारायण तिवारी, रामलीला मंडल संरक्षक व जिला पंचायत सदस्य राजा ठाकुर, भाजपा नेता पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह ठाकुर, पूर्व नपाध्यक्ष अनिल सिंह ठाकुर, नगर परिषद के वर्मतमान अध्यक्ष मनीष सोलंकी

जिला उपाध्यक्ष देवी सिंह ठाकुर,पार्षद ब्रह्मदेव कुबडे, रामलीला मंडल अध्यक्ष संजय तिवारी, पूर्व नपा उपाध्यक्ष ऋषभदास सावरकर, पूर्व रामलीला मंडल अध्यक्ष सुरेश पाल, लक्ष्मीनारायण मालवीय, कांग्रेस नेता विनय शंकर पाठक, धर्मराज मालवीय, अरुण तिवारी, मारोती बारस्कर, धर्मराज मालवीय, राजा आर्य और पत्रकार संघ अध्यक्ष गजानन असवार शामिल हुए।

मंचन की शुरुआत ने बांधा समां – पूजन उपरांत मंचन का शुभारंभ शंकर–पार्वती संवाद से हुआ, जिसमें माता पार्वती के आग्रह पर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें प्रभु श्रीराम जन्म की पावन कथा सुनाई। मंचन में राम जन्म, बाल लीलाएं, मुनि वशिष्ठ का अयोध्या आगमन, राजा दशरथ से संवाद, राम–लक्ष्मण का वनगमन, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार जैसे प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंचन के साथ जयकारों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

दर्शकों के लिए विशेष व्यवस्था- रामलीला मंडल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र मालवीय, बाबूलाल राठौर, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सोनी, सह सचिव शंकर राय, सहकोषाध्यक्ष दलजीत मनवर सहित मंडल पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि इस वर्ष दर्शकों की सुविधा हेतु एलईडी स्क्रीन, आकर्षक लाइटिंग, पेयजल व्यवस्था और आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। साथ ही नगरवासियों से अपील की गई कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस भक्ति, संस्कृति और परंपरा के अद्भुत संगम का लाभ उठाएं।

79 वर्षों की अमर परंपरा – नवयुवक दुर्गा रामलीला मंडल का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 79 वर्षों से सतत चल रही अमर परंपरा है, जो समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का कार्य कर रही है। पहले ही दिन उमड़े श्रद्धालुओं ने यह सिद्ध कर दिया कि श्रीराम कथा की गूंज सदैव जनमानस के हृदय में अमर रहेगी।


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