[responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="यह खबर हिंदी आडिओ में सुने "]

भैंसदेही रेंज में नाकेदार की करतूत! लाभांश की राशि में की गई खुली बंदरबांट, अफसरों की चुप्पी पर उठे सवाल। रेंजर और एसडीओ ने दिए अलग-अलग जानकारी।

(भैंसदेही शंकर राय)दक्षिण वन मंडल के भैंसदेही रेंज से बड़ा मामला सामने आया है, जहां सीतापुर,ओर धामनिया के नाकेदार पर ग्रामीणों के लाभांश की राशि में हेराफेरी कर बंदरबांट करने का आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार, पलस्या समिति में ग्रामीणों के खातों में लाभांश राशि ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी नाकेदार को सौंपी गई थी। लेकिन इस जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए नाकेदार ने कथित रूप से कुछ राशि अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के खातों में डाल दी, जबकि पात्र ग्रामीण आज भी अपने हक के पैसे से वंचित हैं।
————————————————————————-
मामले की जानकारी नाकेदार के ही प्रभारी अधिकारी द्वारा रेंजर और एसडीओ को दी गई, जिसके बाद दोनों अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगीं। बताया जा रहा है कि यह मामला अब वन विभाग की शासनिक अमानत में खयानत (सरकारी धन का दुरुपयोग) की श्रेणी में आता है।
————————————————————————-
————————————————————————-
मामले में जब पलस्या सर्किल के डिप्टी रेंजर के.आर. गीद से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनके सरकारी और निजी दोनों नंबर स्विच ऑफ मिले।
————————————————————————-
वहीं भैंसदेही रेंजर गुमान सिंह नरगिस ने बताया कि राशि अन्य खातों में नहीं डाली गई है जो जानकारी दी गई है वह गलत जानकारी है। सहमति पत्र लिए गये है उसी के बाद राशि डाली गई है। दूसरों के खाते में राशि नहीं डाली जा सकती।
अब सवाल ये उठता है कि जब विभाग के ही नाकेदार को डिवीजन द्वारा सत्यापित लाभांश सूची सौंपी गई थी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिली है, तो जांच कर कार्यवाही के लिए मामला वरिष्ठ कार्यालय को क्यो भेजा जायेगा।
————————————————————————-
दूसरी ओर, एसडीओ दयानंद पांडे भैंसदेही से भी  हमने हमने उनके दूरभाष पर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि वर्तमान में तो ऐसा कोई मामला नहीं आया है लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर अभी जांच चल रही है जो भी दोसी होगा उस पर कार्रवाई होगी।
————————————————————————-
ग्रामीणों में इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरा रोष है। लोग मांग कर रहे हैं कि नाकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। वहीं अफसरों की चुप्पी और बचाव का रवैया कई सवाल खड़े कर रहा है क्या वन विभाग में भ्रष्टाचार पर मौन साध लिया गया है?
क्या लाभांश की रकम गरीबों तक पहुंचने से पहले ही सिस्टम में फंस गई?
————————————————————————-
अब सबकी निगाहें वरिष्ठ वन अधिकारियों पर टिकी हैं, कि वे इस ‘लाभांश लूटकांड’? में कितना संज्ञान लेते हैं या मामला यूं ही फाइलों में दबा दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *