(भैंसदेही शंकर राय)भैंसदेही की राजनीति में यदि किसी नाम ने संगठन के प्रति निष्ठा, विचारधारा के प्रति अटूट विश्वास और कर्मठ कार्यशैली से अपनी अलग पहचान बनाई है, तो वह नाम है देवी सिंह ठाकुर। उनका 34 वर्षों का राजनीतिक सफर केवल पदों की सूची नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की रीति–नीति को जमीन तक उतारने की एक प्रेरणादायी यात्रा है।

विद्यार्थी जीवन से विचारधारा की मजबूत नींव
वर्ष 1992 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर देवी सिंह ठाकुर ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और राष्ट्रनिर्माण का संकल्प माना। छात्र जीवन में रहते हुए उन्होंने अनुशासन, संगठन और वैचारिक स्पष्टता को आत्मसात किया। छात्र संघ चुनावों में सक्रिय भागीदारी ने उनके नेतृत्व कौशल को निखारा और वे एक सजग, जुझारू छात्र नेता के रूप में पहचाने जाने लगे।

युवा मोर्चा में नई ऊर्जा के संवाहक बने देवी सिंह
संगठन ने उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए 2001 से 2007 तक उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया। इस कालखंड में उन्होंने युवाओं को विचारधारा से जोड़ा, बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया और हर आंदोलन व चुनाव में अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य किया। इसके बाद युवा मोर्चा जिला मंत्री के रूप में उन्होंने जिलेभर में संगठनात्मक समन्वय और अनुशासन की मिसाल कायम की।

मंडल और जिला स्तर पर भरोसे का दूसरा नाम
देवी सिंह ठाकुर की सबसे बड़ी पूंजी रही — पार्टी के प्रति निस्वार्थ समर्पण। यही कारण रहा कि उन्हें भाजपा मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी दो बार सौंपी गई। इसके पश्चात वे भाजपा मंडल अध्यक्ष बने, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर संगठन को मजबूती दी, मतभेदों को संवाद से सुलझाया और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाया। बाद में जिला उपाध्यक्ष जैसे अहम दायित्व पर रहते हुए उन्होंने संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सेतु बनकर कार्य किया।

राजनीति से आगे समाज और शिक्षा के प्रति दायित्व
देवी सिंह ठाकुर का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा। वे महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के लगातार सदस्य रहे, जिससे शिक्षा व्यवस्था में जनसहभागिता और पारदर्शिता को बल मिला। यह उनके सामाजिक सरोकार और संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

ईमानदारी, सादगी और संगठन प्रथम का भाव
उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान रही ईमानदारी, सादगी और संगठन को स्वयं से ऊपर रखना। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उसे उन्होंने बिना किसी अपेक्षा, पूरे मनोयोग और निष्ठा से निभाया। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व ने हमेशा उन पर भरोसा जताया और महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे।

प्रेरणा बनता देवी सिंह ठाकुर का 34 वर्षों का सफर
देवी सिंह ठाकुर का यह 34 वर्षों का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर आज की पीढ़ी के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है पद नहीं, प्रतिबद्धता; पहचान नहीं, परिश्रम; और राजनीति नहीं, संगठन साधना ही सच्ची सफलता की राह है।

भैंसदेही ही नहीं, पूरे क्षेत्र में वे आज भी एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित हैं, जो कल भी संगठन के लिए खड़ा था, आज भी खड़ा है और कल भी रहेगा।


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