(भैंसदेही/ शंकर राय) मध्य प्रदेश कांग्रेस में वनवास शब्द अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि संगठन की सबसे बड़ी सियासी चुनौती बन चुका है। खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी यह स्वीकार कर चुके हैं कि पार्टी सत्ता से दूर है, और अब इसे खत्म करने के लिए जमीनी स्तर पर बड़ा सर्जिकल बदलाव जरूरी है।

इसी रणनीति के तहत जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक नियुक्तियों का दौर शुरू हो चुका है और भैंसदेही इस समय इसका सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है भैंसदेही ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर अंदरखाने जो कुछ चल रहा है, उसने कार्यकर्ताओं की नींद उड़ा दी है। पिछले दो वर्षों से इस पद पर काबिज पंकज ‘रानू’ ठाकुर को संगठन का अनुभवी, आक्रामक और सड़क से मंच तक लड़ाई लड़ने वाला चेहरा माना जाता है। आंदोलनों, धरना–प्रदर्शनों और संगठनात्मक बैठकों में उनकी सक्रियता ने उन्हें मजबूत दावेदार बना दिया है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा आम है कि पंकज रानू ठाकुर को पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे का सबसे भरोसेमंद और करीबी माना जाता है। वहीं, मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम का संरक्षण और समर्थन भी उन्हें लगातार मिलता रहा है। यही कारण है कि रानू ठाकुर को रीपीट अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है।

लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भेजी गई सूची में रानू ठाकुर के साथ दो और नाम शामिल हैं जिसमें अशोक अड़लक और प्रशांत वागदे। दोनों ही नेता विधायक धरमू सिंह सिरसाम के करीबी माने जाते हैं और कुनबी समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन अनुभव पर दांव लगाएगा या फिर सामाजिक समीकरण साधने के लिए नया चेहरा आगे करेगा?

कांग्रेस के भीतर यह चर्चा अब खुलेआम होने लगी है कि अगर पुराने चेहरे को हटाया गया तो संगठन में असंतोष फूट सकता है, वहीं दूसरा खेमा कह रहा है नए नेतृत्व के बिना नई ऊर्जा कैसे आएगी? भैंसदेही में हालत यह है कि हर गुट अपनी जीत तय मानकर बैठा है। चाय की दुकानों से लेकर पार्टी कार्यालय तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है ब्लॉक कांग्रेस की कुर्सी किसके हाथ लगेगी?

एक तरफ अनुभव, निष्ठा और निरंतरता का दावा…
दूसरी तरफ सामाजिक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों का दबाव…अब निगाहें सिर्फ प्रदेश कांग्रेस की अंतिम सूची पर टिकी हैं। क्योंकि फैसला चाहे जो भी हो भैंसदेही की कांग्रेस राजनीति में भूचाल आना तय है।


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