(भैंसदेही शंकर राय)”लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”— यह पंक्तियां भैंसदेही क्षेत्र के दो जांबाज युवाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। ग्राम कौड़ी निवासी निलेश मस्कोले और ग्राम बड़गांव निवासी अंकित उइके ने कठिन परिस्थितियों और आर्थिक अभावों से लड़ते हुए वह मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है।

भारत सरकार की अग्निपथ योजना के अंतर्गत दोनों युवाओं का चयन भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में हुआ है। साधारण मजदूर परिवारों से आने वाले इन युवाओं ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह सफलता अर्जित की है। उनके माता-पिता ने मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटों के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया।

मंगलवार को जब दोनों अग्निवीर अपने क्षेत्र पहुंचे तो गांव में उत्साह का माहौल देखने को मिला। परिवारजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। इस दौरान दोनों जवानों के माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वर्षों के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों का यह पल उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं था।

निलेश और अंकित ने कहा कि देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्हें गर्व है कि उन्हें भारत माता की रक्षा का अवसर मिला है। उन्होंने युवाओं से भी कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता रिषभदास सावरकर, जीवन उइके, गुलाबराव सेलकरे, रामा परिसे, शिक्षक मिलिंद निवावे, दसन मस्कोले, प्रदीप धुर्ले, देवीराम नरवारे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा साथी, बुजुर्ग एवं मातृशक्ति उपस्थित रही।

दोनों युवाओं की सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो गरीबी कभी भी मंजिल की राह में बाधा नहीं बन सकती। आज निलेश और अंकित केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे भैंसदेही क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गए हैं।


[responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="यह खबर हिंदी आडिओ में सुने "]