(भैंसदेही शंकर राय) भैंसदेही भाजपा नगर मंडल में नया अध्यक्ष चुने जाने को लेकर सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। नगर से लेकर जिले तक भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में हलचल मची हुई है। गुटबाजी और वर्चस्व की जंग अब खुले तौर पर सामने आने लगी है। इस बार अध्यक्ष पद को लेकर ऐसा समीकरण बन रहा है, जो भविष्य की भाजपा राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

दो धड़ों में बंटी भाजपा, अंदरखाने मची खींचतान सूत्रों की मानें तो नगर मंडल अध्यक्ष पद की दौड़ में एक ओर विधायक महेंद्र सिंह चौहान अपने विश्वासपात्र को अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, तो दूसरी ओर संगठन स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के मूड में नजर आ रहा है। भाजपा की नगर राजनीति इस समय गुटबाजी के दलदल में फंसी है। विधायक खेमा उन कार्यकर्ताओं को लेकर असंतुष्ट है जिन्होंने विधानसभा चुनाव में खुलकर साथ नहीं दिया था। वहीं, सांसद समर्थक खेमा अपने प्रत्याशी को आगे बढ़ाने की कवायद में जुटा है।

विधायक की चली तो ये बन सकते हैं अध्यक्ष
विधायक महेंद्र सिंह चौहान की पसंद अगर संगठन ने मानी, तो मनीष नावंगे और ब्रह्मदेव पटेल प्रमुख दावेदार बन सकते हैं। मनीष नावंगे सामाजिक स्तर पर भी मजबूत माने जाते हैं वे भैंसदेही क्षत्रिय लोणारी कुंनबी समाज के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनका संगठन और समाज दोनों पर अच्छा प्रभाव है। उनका अचानक राजनीति में आना खुद में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

अगर संगठन ने दिखाई आत्मनिर्भरता तो केसर लोखंडे फिर से रेस में दूसरी ओर, यदि संगठन अनुभव और संतुलन को प्राथमिकता देता है तो वर्तमान मंडल अध्यक्ष केसर लोखंडे की वापसी भी संभव है। लोखंडे संगठन की कार्यशैली से परिचित हैं और पुराने कार्यकर्ताओं में उनकी पकड़ मानी जाती है। संगठन उनके कामकाज से संतुष्ट भी रहा है।

सिर्फ एक चेहरा नहीं, कई समीकरण तय होंगे
भैंसदेही नगर अध्यक्ष की यह नियुक्ति मात्र एक पद भर नहीं है यह भविष्य की राजनीति का ट्रायल रन भी है। यहां यह तय होगा कि भाजपा में विधायक की बात चलेगी या संगठन का सिद्धांत हावी रहेगा। यह नियुक्ति तय करेगी कि आने वाले समय में टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक किसकी पकड़ मजबूत होगी।

जल्द होगी घोषणा, सियासी शतरंज के मोहरे सज चुके हैं भाजपा के भीतर चल रही यह राजनीतिक उठापटक अब अंतिम चरण में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि संगठन किस पाले में जाता है विधायक की पसंद को प्राथमिकता देता है या अनुभव व कार्यशैली को।

नगर अध्यक्ष कौन? इस सवाल ने भाजपा की भीतरी राजनीति को उबाल पर ला दिया है। फैसले के बाद ही साफ होगा कि भैंसदेही भाजपा का अगला मार्गदर्शक कौन बनेगा।


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