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पोहर की मिट्टी से निकला सपना, पिता ने खुद को होम कर दिया और बेटी ने दुनिया जीत ली स्व. यादवराव मगरदे का सपना बनी डॉ. रूपा मगरदे की ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय उड़ान।

(भैंसदेही शंकर राय) भैंसदेही के ग्राम पोहर के लिए यह दिन सिर्फ खुशी का नहीं, बल्कि आंसुओं, संघर्ष और सपनों की जीत का दिन है। यह कहानी है उस पिता की, जिसने अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया, और आज उसी के सपनों को उसकी बिटिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर साकार कर दिखाया।
ग्राम पोहर निवासी स्वर्गीय श्री यादवराव मगरदे एक ऐसे पिता थे, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए बड़े सपने देखे। वे चाहते थे कि उनका बेटा-बेटी वह सब करें, जहां उन्हें सम्मान, सफलता और पहचान मिले। सीमित साधन, ग्रामीण परिस्थितियां और कठिन हालात लेकिन पिता के हौसले कभी कम नहीं हुए। उन्होंने अपनी जरूरतों को पीछे रख, बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। कभी खेत, कभी मजदूरी, कभी जिम्मेदारियों का बोझ लेकिन बच्चों की किताबें, फीस और भविष्य कभी रुकने नहीं दिया।
आज भले ही स्वर्गीय यादवराव मगरदे इस खुशी के साक्षी नहीं हैं, लेकिन उनका सपना आज इतिहास बन चुका है। उनके बेटे डॉ. संदीप मगरदे और बिटिया डॉ. रूपा मगरदे ने अपने कर्म और सफलता से पिता के नाम को अमर कर दिया है।
गांव की बेटी बनी वैश्विक पहचान
ग्राम पोहर की होनहार बेटी डॉ. रूपा मगरदे ने पीएचडी की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन प्रतिष्ठित ‘लिंकन ग्लोबल पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप’ (L-GPR), मलेशिया के लिए हुआ है। इस ऐतिहासिक चयन के साथ उन्हें मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया के संस्थानों द्वारा लगभग 32 लाख रुपये की स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी।
इस फेलोशिप के अंतर्गत डॉ. रूपा को विश्व स्तरीय शोध संस्थानों और वाइब्रास्फीयर टेक्नोलॉजीज के सहयोग से अत्याधुनिक शोध कार्य करने का अवसर मिलेगा। यह उपलब्धि न केवल उनके शैक्षणिक जीवन का स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि ग्रामीण भारत की प्रतिभा की वैश्विक पहचान का प्रमाण भी है।
पिता का संघर्ष बना सफलता की नींव
डॉ. रूपा की यह सफलता सिर्फ डिग्री या फेलोशिप नहीं है, बल्कि एक पिता के संघर्ष, त्याग और विश्वास की जीत है। यह बताती है कि अगर पिता का संकल्प मजबूत हो, तो गांव की गलियों से भी दुनिया के बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। इस शिखर तक पहुंचने में डॉ. संदीप मगरदे भैया, पूरे परिवार का मार्गदर्शन, समर्थन और विश्वास हमेशा साथ रहा। परिवार ने हर मुश्किल में एक-दूसरे का हाथ थामे रखा और आज उसी का परिणाम पूरे गांव के सामने गर्व के रूप में खड़ा है।
आज पूरा पोहर गांव, क्षेत्र, समाज और देश डॉ. रूपा मगरदे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गौरव महसूस कर रहा है। यह सफलता आने वाली पीढ़ियों, खासकर बेटियों को यह संदेश देती है कि सपने गांव में भी पलते हैं और उड़ान दुनिया तक जाती है।
डॉ. रूपा मगरदे को उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं। स्वर्गीय पिता यादवराव मगरदे को नमन जिनका सपना आज इतिहास बन गया।

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