भैंसदेही (शंकर राय):मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में प्रदेशभर में संगठन को धार देने का सिलसिला तेज हो गया है। इसी कड़ी में रविवार को ग्राम गुदगांव में कांग्रेस जिलाध्यक्ष निलय डागा की उपस्थिति में भैंसदेही के लोकप्रिय और कर्मठ नेता धर्मेंद्र मालवीय को एक बार फिर कांग्रेस मंडलम अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।

धर्मेंद्र मालवीय केवल एक नाम नहीं, बल्कि भैंसदेही कांग्रेस की मजबूत पहचान बन चुके हैं। वर्षों से संगठन की रीढ़ बनकर काम कर रहे मालवीय ने हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता को साथ लेकर चलने की जो परंपरा बनाई है, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। चुनावी रणनीति हो या संगठन विस्तार—हर मोर्चे पर उनकी सक्रियता और सूझबूझ ने कांग्रेस को मजबूती दी है।

उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे जमीन से जुड़े हुए नेता हैं, जो कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहते हैं। जब-जब संगठन ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी, उन्होंने उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया। यही वजह है कि पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए यह अहम दायित्व सौंपा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धर्मेंद्र मालवीय की पुनर्नियुक्ति से भैंसदेही में कांग्रेस संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। उनकी मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता पार्टी को जमीनी स्तर पर और सशक्त बनाएगी।

इस अवसर पर पूर्व विधायक धरमू सिंह सिरसाम, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष विनय शंकर पाठक, धरम पाल सिंह ठाकुर, राजा आर्य, नरेश मोहरे, अनिल निनावे, शोएब विंध्यानी, अनिल मालवीय, संजय मवास्कर, रफीक खान, अल्लाय बंजारा, गणेश राय, विजय भुसकुटे, विक्रम सांडे, राज धाड़से, अलकेश चौहान, कृष्णा ठाकुर, दिलीप सिंह ठाकुर, मोटू तायडे, अरविंद झरबड़े सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का विश्वास जताया।

खास बात यह भी है कि धर्मेंद्र मालवीय को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ का बेहद करीबी माना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है, जो शीर्ष नेतृत्व से सीधा संवाद रखते हुए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में सक्षम हैं।

निष्कर्ष:
धर्मेंद्र मालवीय की ताजपोशी केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि उस भरोसे की पुनर्पुष्टि है जो कांग्रेस संगठन जमीनी और समर्पित नेताओं पर करता है। अब देखना होगा कि उनके नेतृत्व में भैंसदेही कांग्रेस किस तरह नई राजनीतिक दिशा और मजबूती हासिल करती है।


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