(भैंसदेही शंकर राय )व्यक्ति विशेष-भैंसदेही की धरती पर एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी लिखी गई है, जो हर उस इंसान के दिल को छू जाती है, जिसने कभी अभावों में रहकर बड़े सपने देखने की हिम्मत की हो। यह कहानी है प्रमोद महाले की—एक ऐसे कर्मयोगी की, जिन्होंने अपने संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास के दम पर न सिर्फ खुद को स्थापित किया, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य को भी सुरक्षित बनाया।

31 जुलाई 1996 का वह दिन, जब प्रमोद महाले ने भारतीय जीवन बीमा निगम में एक साधारण जीवन बीमा सलाहकार के रूप में अपने सफर की शुरुआत की। उस समय न संसाधन थे, न पहचान—बस एक जुनून था, कुछ कर दिखाने का। पहला प्रीमियम मात्र 848 रुपये का था, लेकिन उस छोटी सी शुरुआत में ही उनके बड़े सपनों की झलक छिपी थी।

संघर्ष इतना आसान नहीं था। 18 महीनों तक साइकिल से गांव-गांव घूमना, धूप, बारिश और ठंड की परवाह किए बिना लोगों को बीमा के महत्व को समझाना—यह केवल काम नहीं, बल्कि एक तपस्या थी। कई बार लोगों ने अनदेखा किया, कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके चेहरे की सच्चाई और शब्दों की ईमानदारी ने धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीतना शुरू कर दिया।

1997 में जब उन्होंने अपनी पहली बाइक खरीदी, तो वह सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि उनके संघर्ष की पहली जीत थी। इसके बाद उनका सफर रुकने का नाम ही नहीं लिया। धीरे-धीरे उन्होंने 4,287 से अधिक ग्राहकों का एक ऐसा परिवार खड़ा किया, जो आज भी उन पर अटूट विश्वास रखता है। उनका कुल प्रथम प्रीमियम संग्रह 3 करोड़ 52 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया और बीमा कवर का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये को पार कर गया—जो उनकी मेहनत और समर्पण का जीवंत प्रमाण है।

वर्ष 2009 में उन्हें LIC के प्रतिष्ठित चेयरमैन क्लब का सदस्य बनाया गया, और 2010 में प्रीमियम कलेक्शन का विशेष अधिकार मिला। “श्री सिद्धिविनायक जीवन बीमा सेवा केंद्र” के माध्यम से उन्होंने अपनी सेवाओं को एक नई पहचान दी, जो आज क्षेत्र में भरोसे का प्रतीक बन चुका है।

लेकिन असली गौरव का क्षण तब आया, जब 2013 में उन्हें MDRT (USA) जैसा विश्व स्तरीय सम्मान प्राप्त हुआ। यह सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं था, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष, त्याग और मेहनत का सम्मान था। और यह सिलसिला यहीं नहीं रुका—2013 से लेकर 2026 तक लगातार 8 बार MDRT सम्मान प्राप्त कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता एक बार नहीं, बल्कि बार-बार हासिल की जा सकती है।

प्रमोद महाले कहते हैं कि उन्होंने इस पेशे को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया। उनका उद्देश्य हमेशा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लोगों के बीच बचत और सुरक्षा की भावना को मजबूत करना रहा है।

आज प्रमोद महाले की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखता है। यह कहानी सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।


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