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यूरिया-डीएपी के बाद अब डीजल संकट की मार: बैतूल जिले में 90 फीसदी पेट्रोल पंप सूखे, ईंधन के लिए भटक रहे किसान, खेती-किसानी पर मंडराया संकट का खतरा।

(बैतूल शंकर राय)बैतूल जिले में किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर किसान चिंतित थे, वहीं अब डीजल की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जिले में भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) से जुड़े अधिकांश पेट्रोल पंपों पर डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि जिले के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर डीजल का स्टॉक समाप्त हो चुका है या बेहद सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
डीजल की तलाश में किसान एक पेट्रोल पंप से दूसरे पेट्रोल पंप तक भटकने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर किसानों को घंटों इंतजार करने के बाद भी डीजल नहीं मिल पा रहा है। इससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। वर्तमान समय में खेतों की तैयारी, सिंचाई और कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर एवं अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है, जो पूरी तरह डीजल पर निर्भर हैं।
डीजल की कमी की खबर फैलने के बाद किसानों में भय और चिंता का माहौल बन गया है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई तो आगामी कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। वहीं कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि डीजल की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ रही है।
जिले में डीजल संकट को लेकर आम लोगों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी चिंता बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और तेल कंपनियों पर टिकी हैं कि वे इस समस्या का जल्द समाधान निकालें ताकि किसानों और आम नागरिकों को राहत मिल सके।
जिले में डीजल की कमी को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है और लोग जल्द आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद कर रहे हैं।

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